क्या बनना चाहते हो बेटा…..

बचपन में घर आए मेहमानों का सबसे पसंदीदा प्रश्न होता था क्या बनना चाहते हो बेटा…. जब तक समझ नहीं थी तब तक सिर्फ यह कहते थे कि पापा की तरह बनना चाहते हैं जबकि यह भी ज्ञात नहीं था कि पिताजी करते क्या है बस इतना पता था कि वह सुबह 8:00 बजे जाते हैं और रात में 8:00 बजे आते हैं और हमारे कुछ जरूरत की चीजों के साथ कुछ पैसे भी लेकर आते हैं, थोड़े बड़े हुए तो पता चला कि पिताजी लैब टेक्नीशियन है जो कि एक प्राइवेट हॉस्पिटल के अंतर्गत अपनी पैथोलॉजी चलाते हैं|

उनके क्रियाकलाप को देखते हुए यह तो तय हो गया था कि हमें वह नहीं बनना है जो हमने पूर्व में निर्धारित किया है…. हमें कुछ अलग करना है, बिल्कुल अलग करना है|

लेकिन अभी भी इस बात का निर्धारण नहीं हो पाया है कि हमें बनना क्या है, कभी कभी रात में एरोप्लेन को देखकर पायलट बनने की सोच लेते तो कभी घर के पीछे से गुजरती हुई ट्रेन को देखकर ट्रेन का ड्राइवर बनने की इच्छा होने लगती। समय बीतने के साथ-साथ फुटबॉलर क्रिकेटर सिंगर एक्टर कॉमेडियन सब बनने की इच्छा होने लगी, जिसका भूत पिताजी ने बहुत ही कम समय में उतार दिया😅

नौवीं कक्षा में पहुंचने पर यह तय हो गया कि हम डॉक्टर बनेंगे 😂, और पूरे प्लान के तहत हमने सोच लिया था कि अब सिर्फ जीवविज्ञान का ही अध्ययन करेंगे जीवनभर लेकिन पिताजी और भ्राता श्री हमेशा की तरह एक बार फिर विजयी हुए😅

जैसे तैसे करके हम 86% अंकों के साथ कक्षा 10 पास हुए, एक बार फिर हमने निर्धारित किया कि हम अभी तो बायो पढ़ेंगे लेकिन बाद में बीए करेंगे और सिविल सर्विस की तैयारी करेंगे क्योंकि कहीं से सुना था सबसे पावरफुल और पैसे वाला शहर का डीएम होता है 😂

इन्हीं सपनों के साथ हम गर्मी की छुट्टियों में सुबह से लेकर शाम तक रोजाना मैच खेलने जाते और रात में आकर थोड़ी बहुत सामान्य ज्ञान की पढ़ाई करते, माताजी को प्रक्रिया रास नहीं आई और उन्होंने पिता जी से कहकर भाई के साथ ही मुझे भी कोटा भेजने का निर्णय कर लिया। अगले दिन जब हम मैच खेलकर घर पहुंचे तो पिताजी के हाथ में 19038 अवध एक्सप्रेस गोंडा टू कोटा का टिकट देखकर बड़ी हैरानी हुई। साथ ही यह भी निर्धारित हो गया कि हम बड़े होकर कोई डॉक्टर वॉक्टर नहीं बनने वाले बल्कि हमें 11वीं कक्षा से इंजीनियरिंग अर्थात आईआईटी जेईई की तैयारी करनी थी कोटा में😥…. यहीं से शुरू होते हैं मेरे बुरे दिन।

3 साल कोटा में तैयारी करने के बाद मैंने इंजीनियरिंग करने का निर्णय लिया पूरे 6 महीने एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में बिताने के बाद मैंने इंजीनियरिंग को भी अलविदा बोल दिया और अपनी नॉर्मल से पढ़ाई को कंप्लीट करते हुए वापस दिल्ली पहुंच गया जहां से मुझे अपने सपने बहुत ही करीब दिखाई दे रहे थे जिनके रास्ते मुखर्जी नगर की ओर जाते हुए दिखाई दिए। दिल्ली में हमारे सपने सपने ही रह गए और हमने वहां पर दोस्तों संग जमकर मस्ती की पढ़ाई को एक साइड में रख दिया और जिंदगी का खुल कर मजा लिया वैसे जिंदगी वही सेम चीज आप मेरे साथ रिपीट कर रही है।

वैसे जो हमने कुछ अलग बिल्कुल अलग करने का सोचा था वो हमे अब एक सरकारी स्कूल में 9 से 3 दिखाई पड़ता है बस…लेकिन लोगों का जो एक सवाल होता था बेटा क्या बनना चाहते हो उसपे बस एक बात कहना चाहता हूं….

बेस्ट बनना चाहता हूं, परफेक्ट बनना चाहता हूं,

आसान बनना चाहता हूं, आधार बनना चाहता हूं,

हिस्सा बनना चाहता हूं, किस्सा बनना चाहता हूं,

पतवार बनना चाहता हूं,परिवार बनना चाहता हूं…❣

 

ये ज़वानी है दीवानी….

मेरे लाइफ की बेहतरीन फिल्मो में से एक, आज मैंने इसे शायद 14वीं बार देखा,इससे अधिक बार मैंने सिर्फ रांझणा फ़िल्म देखी है।

2013 में जब यह फ़िल्म आयी थी तब हम कोटा में इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे थे,रूममेट राहुल भैया ने इतनी तारीफ कर दी कि रहा ही नही गया हमसे देखे बिना,और जब एक बार देख लिए तो लत लग गयी दीपिका रणबीर की😂😅

हम और राहुल भैया लगभग हर वीकेंड पर इसे देखते थे इसे क्योंकि वीकेंड पर हम अपना टेस्ट बेकार कर के आते थे।

मूवी देखने के बाद राहुल भैया बोलते थे बेटा हम तो मेडिकल वाले हैं,सेलेक्ट तो हो ही जायेंगे किसी न किसी एटेम्पट मे,लेकिन तुम लटक जाओगे पक्का कहीं😅

साल बीतने के बाद यही हुआ, राहुल भैया SN MEDICAL COLLEGE AGRA के लिए सेलेक्ट हो गए और हम दो कॉलेज ड्राप करके दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

अच्छी बात ये है कि राहुल भैया अब मेरी लाइफ को हिट मानते हैं फिल्मो की तरह😂😅,साथ ही मुझे भी भरोसा है खुद पे की मेरी लाइफ थोड़ी देर से ही सही,मगर मजेदार जरूर होगी।

साथ ही इस फ़िल्म को एक और बार भैया आपके साथ ही देखना चाहता हूँ,लेकिन इस बार खुद को आपके लेवल में लाके ही ऐसा करूँगा, और हाँ हमारी उदयपुर घूमने की प्लानिंग भी इस बार सफल होगी।

#missyoubhaiya

#missyoukota

इंस्टा का वो रेड सिंग्नल

इंस्टाग्राम के इनबॉक्स में मानो कोई एक ख़त छोड़ गया हो,

जहाँ सिर्फ उसके जाने की ज़िक्र है बेवजह, आने की शायद एक छोटी सी गुंजाइश,जिसकी उम्मीद मुझे अभी भी है, कुछ बताया नही बस इतना कहा कि मैं कॉल करती रहूँगी, जो शायद,’कोशिश करेंगे’,मानो यही कहना चाहती हों।

इनबॉक्स के एक कोने से शुरू हुई थी हमारी दुनिया,शायद वहीं खत्म न हो,चाहत सिर्फ इतनी सी है। तुम्हारी दुनिया मे थोड़ी उथल पुथल चल रही है इसका अंदाज़ा है मुझे उम्मीद है वक़्त के साथ हालात अच्छे होंगे,और एक दिन फिर से उसी इनबॉक्स पर पॉपअप होंगे कुछ अच्छे लफ्ज़💞

Dear friend इंतज़ार रहेगा हमे वहीं, जहाँ से मेरी खुशियाँ निर्धारित होती हैं।